📚 Navigation
← All Chapters
Current Chapter
Arjuna Vishada Yoga
47 verses
Chapter 1 • Verse 28
Arjuna Vishada Yoga
कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत् | अर्जुन उवाच | दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् ||१-२८||
kṛpayā parayāviṣṭo viṣīdannidamabravīt . arjuna uvāca . dṛṣṭvemaṃ svajanaṃ kṛṣṇa yuyutsuṃ samupasthitam ||1-28||
🌸 Hindi Translation
।।1.28 -- 1.30।। अर्जुन बोले - हे कृष्ण! युद्ध की इच्छावाले इस कुटुम्ब-समुदाय को अपने सामने उपस्थित देखकर मेरे अङ्ग शिथिल हो रहे हैं और मुख सूख रहा है तथा मेरे शरीर में कँपकँपी आ रही है एवं रोंगटे खड़े हो रहे हैं। हाथ से गाण्डीव धनुष गिर रहा है और त्वचा भी जल रही है। मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है और मैं खड़े रहने में भी असमर्थ हो रहा हूँ।
— Swami Ramsukhdas