📚 Navigation
← All Chapters
Current Chapter
Vishvarupa Darshana Yoga
55 verses
Chapter 11 • Verse 10
Vishvarupa Darshana Yoga
अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् | अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ||११-१०||
anekavaktranayanamanekādbhutadarśanam . anekadivyābharaṇaṃ divyānekodyatāyudham ||11-10||
🌸 Hindi Translation
।।11.10 -- 11.11।। जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्तरूपवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देव-(अपने दिव्य स्वरूप-) को भगवान् ने दिखाया।
— Swami Ramsukhdas