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Bhakti Yoga
20 verses
Chapter 12 • Verse 14
Bhakti Yoga
सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः | मय्यर्पितमनोबुद्धिर्यो मद्भक्तः स मे प्रियः ||१२-१४||
santuṣṭaḥ satataṃ yogī yatātmā dṛḍhaniścayaḥ . mayyarpitamanobuddhiryo madbhaktaḥ sa me priyaḥ ||12-14||
🌸 Hindi Translation
।।12.14।।सब प्राणियोंमें द्वेषभावसे रहित, सबका मित्र (प्रेमी) और दयालु, ममतारहित, अहंकाररहित, सुखदुःखकी प्राप्तिमें सम, क्षमाशील, निरन्तर सन्तुष्ट,योगी, शरीरको वशमें किये हुए, दृढ़ निश्चयवाला, मेरेमें अर्पित मन-बुद्धिवाला जो मेरा भक्त है, वह मेरेको प्रिय है।
— Swami Ramsukhdas