📚 Navigation

← All Chapters
Current Chapter
Sankhya Yoga
72 verses
Chapter 2 • Verse 46

Sankhya Yoga

यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके | तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः ||२-४६||

yāvānartha udapāne sarvataḥ samplutodake . tāvānsarveṣu vedeṣu brāhmaṇasya vijānataḥ ||2-46||

🌸 Hindi Translation

।।2.46।। सब तरफसे परिपूर्ण महान् जलाशयके प्राप्त होनेपर छोटे गड्ढों में भरे जल में मनुष्यका जितना प्रयोजन रहता है अर्थात् कुछ भी प्रयोजन नहीं रहता, वेदों और शास्त्रोंको तत्त्वसे जाननेवाले ब्रह्मज्ञानीका सम्पूर्ण वेदोंमें उतना ही प्रयोजन रहता है अर्थात् कुछ भी प्रयोजन नहीं रहता।

— Swami Ramsukhdas

PreviousNext