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Karma Yoga
43 verses
Chapter 3 • Verse 16
Karma Yoga
एवं प्रवर्तितं चक्रं नानुवर्तयतीह यः | अघायुरिन्द्रियारामो मोघं पार्थ स जीवति ||३-१६||
evaṃ pravartitaṃ cakraṃ nānuvartayatīha yaḥ . aghāyurindriyārāmo moghaṃ pārtha sa jīvati ||3-16||
🌸 Hindi Translation
।।3.16।। हे पार्थ! जो मनुष्य इस लोकमें इस प्रकार परम्परासे प्रचलित सृष्टिचक्रके अनुसार नहीं चलता, वह इन्द्रियोंके द्वारा भोगोंमें रमण करनेवाला अघायु (पापमय जीवन बितानेवाला) मनुष्य संसारमें व्यर्थ ही जीता है।
— Swami Ramsukhdas