📚 Navigation

← All Chapters
Current Chapter
Karma Yoga
43 verses
Chapter 3 • Verse 26

Karma Yoga

न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम् | जोषयेत्सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन् ||३-२६||

na buddhibhedaṃ janayedajñānāṃ karmasaṅginām . joṣayetsarvakarmāṇi vidvānyuktaḥ samācaran ||3-26||

🌸 Hindi Translation

।।3.25 -- 3.26।। हे भरतवंशोद्भव अर्जुन! कर्ममें आसक्त हुए अज्ञानीजन जिस प्रकार कर्म करते हैं आसक्तिरहित विद्वान भी लोकसंग्रह करना चाहता हुआ उसी प्रकार कर्म करे। सावधान तत्त्वज्ञ महापुरुष कर्मोंमें आसक्तिवाले अज्ञानी मनुष्योंकी बुद्धिमें भ्रम उत्पन्न न करे, प्रत्युत स्वयं समस्त कर्मोंको अच्छी तरहसे करता हुआ उनसे भी वैसे ही करवाये।

— Swami Ramsukhdas

PreviousNext