📚 Navigation

← All Chapters
Current Chapter
Jnana Karma Sannyasa Yoga
42 verses
Chapter 4 • Verse 30

Jnana Karma Sannyasa Yoga

अपरे नियताहाराः प्राणान्प्राणेषु जुह्वति | सर्वेऽप्येते यज्ञविदो यज्ञक्षपितकल्मषाः ||४-३०||

apare niyatāhārāḥ prāṇānprāṇeṣu juhvati . sarve.apyete yajñavido yajñakṣapitakalmaṣāḥ ||4-30||

🌸 Hindi Translation

।।4.29 -- 4.30।। दूसरे कितने ही प्राणायामके परायण हुए योगीलोग अपानमें प्राणका पूरक करके, प्राण और अपानकी गति रोककर फिर प्राणमें अपानका हवन करते हैं; तथा अन्य कितने ही नियमित आहार करनेवाले प्राणोंका प्राणोंमें हवन किया करते हैं। ये सभी साधक यज्ञोंद्वारा पापोंका नाश करनेवाले और यज्ञोंको जाननेवाले हैं।

— Swami Ramsukhdas

PreviousNext