📚 Navigation
← All Chapters
Current Chapter
Aksara Brahma Yoga
28 verses
Chapter 8 • Verse 12
Aksara Brahma Yoga
सर्वद्वाराणि संयम्य मनो हृदि निरुध्य च | मूध्न्यार्धायात्मनः प्राणमास्थितो योगधारणाम् ||८-१२||
sarvadvārāṇi saṃyamya mano hṛdi nirudhya ca . mūdhnyā^^rdhāyātmanaḥ prāṇamāsthito yogadhāraṇām ||8-12||
🌸 Hindi Translation
।।8.12 -- 8.13।। (इन्द्रियोंके) सम्पूर्ण द्वारोंको रोककर मनका हृदयमें निरोध करके और अपने प्राणोंको मस्तकमें स्थापित करके योगधारणामें सम्यक् प्रकारसे स्थित हुआ जो 'ऊँ' इस एक अक्षर ब्रह्मका उच्चारण और मेरा स्मरण करता हुआ शरीरको छोड़कर जाता है, वह परमगतिको प्राप्त होता है।
— Swami Ramsukhdas