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Aksara Brahma Yoga
28 verses
Chapter 8 • Verse 25
Aksara Brahma Yoga
धूमो रात्रिस्तथा कृष्णः षण्मासा दक्षिणायनम् | तत्र चान्द्रमसं ज्योतिर्योगी प्राप्य निवर्तते ||८-२५||
dhūmo rātristathā kṛṣṇaḥ ṣaṇmāsā dakṣiṇāyanam . tatra cāndramasaṃ jyotiryogī prāpya nivartate ||8-25||
🌸 Hindi Translation
।।8.25।। जिस मार्गमें धूमका अधिपति देवता, रात्रिका अधिपति देवता, कृष्णपक्षका अधिपति देवता और छः महीनोंवाले दक्षिणायनका अधिपति देवता है, शरीर छोड़कर उस मार्गसे गया हुआ योगी (सकाम मनुष्य) चन्द्रमाकी ज्योतिको प्राप्त होकर लौट आता है अर्थात् जन्म-मरणको प्राप्त होता है।
— Swami Ramsukhdas